जब भी कोई बड़ी देशभक्ति फिल्म आती है, तो लोगों के दिल में वही पुरानी आग फिर से जल उठती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ ‘बॉर्डर 2’ के साथ। रिलीज से पहले से ही इसे जवान और पठान जैसी फिल्मों से तुलना की जा रही थी।
सोशल मीडिया पर ट्रेलर ट्रेंड कर रहा था, सिनेमाघरों के बाहर पोस्टर चमक रहे थे, और फैंस को लग रहा था इस बार इतिहास बदलेगा।
लेकिन पहला हफ्ता बीतते ही सच्चाई सामने आ गई।
पहले हफ्ते का खेल: उम्मीदें बड़ी थीं
बॉर्डर 2 ने ओपनिंग शानदार की। पहले तीन दिन में ही सिनेमाघरों में भीड़ दिखने लगी। खासकर छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन थिएटर में लोगों ने परिवार के साथ फिल्म देखी।
तालियां, सीटियां और “भारत माता की जय” के नारे सब कुछ वैसा ही था जैसा किसी देशभक्ति फिल्म में होता है।लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते, रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ने लगी।
कमाई अच्छी रही, लेकिन रिकॉर्ड तोड़ने जितनी नहीं।
गदर 2’ क्यों बन गई पहाड़ ?

जब गदर 2 आई थी, तब उसने ऐसा तूफान मचाया था कि हर सिनेमाघर हाउसफुल चल रहा था।
लोग सिर्फ फिल्म देखने नहीं, बल्कि इमोशन दोबारा जीने आए थे।
यही वजह है कि आज भी गदर 2 का पहले हफ्ते का रिकॉर्ड कोई नहीं छू पाया —
न जवान,न पठान,और अब न ही बॉर्डर 2।
‘बॉर्डर 2’ की सबसे बड़ी ताकत
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है — भावनाएं।यह सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं है, यह उन परिवारों की भी कहानी है जो हर रोज अपने बेटे को सीमा पर भेजते हैं।
Sunny Deol की मौजूदगी ने पुराने दर्शकों को जोड़ा,और नए कलाकारों ने युवा दर्शकों को खींचा।
लेकिन शायद कहानी में वो “जादू” नहीं था, जो लोगों को बार-बार सिनेमाघर तक खींच सके।
जवान और पठान से तुलना
जवान और पठान दोनों ही अलग तरह की फिल्में हैं —एक्शन, स्टाइल, बड़े स्टार और ग्लैमर।
बॉर्डर 2 का रास्ता अलग था — भावनाओं, देशभक्ति और दर्द का रास्ता।
इस वजह से दर्शकों का वर्ग सीमित रह गया, जबकि जवान और पठान हर उम्र के लोगों तक पहुंच पाईं।
सच यही है…
बॉर्डर 2 फ्लॉप नहीं है — लेकिन ये वो तूफान भी नहीं बन पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
और गदर 2 आज भी पहाड़ की तरह खड़ी है — जिसे गिराना इतना आसान नहीं।




