LIVE: Bilaspur train accident / बिलासपुर में एक ट्रेन हादसा ,मालगाड़ी पर चढ़ गई पैसेंजर ट्रेन, 6 लोगों की मौत, ₹10 लाख मुआवजे का ऐलान

अद्यतन स्थिति:

  • मृतकों की संख्या: 8
  • घायलों की संख्या: 14 से अधिक।

बिलासपुर ट्रेन दुर्घटना: एक दुखद हादसा (विस्तृत रिपोर्ट)

अद्यतन स्थिति:

मंगलवार, 4 नवंबर, 2025 की शाम को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक भीषण रेल दुर्घटना हुई है, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास में हुई इस टक्कर में एक पैसेंजर ट्रेन (MEMU लोकल) एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान भी चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए। इस रिपोर्ट में हम घटना की पूरी जानकारी को, हताहतों का विवरण, राहत एवं बचाव कार्यों, मुआवजे की घोषणा और हादसे के संभावित कारणों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।

01 घटना का विवरण (The Incident)

  • तारीख और समय: यह दुर्घटना मंगलवार के दिन शाम को लगभग 4:00 बजे (16:00 घंटे) हुई है।
  • स्थान: घटना छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्टेशन के पास ही गटौरा और बिलासपुर स्टेशनों के बीच हुई। कुछ रिपोर्ट्स में इसे लालखदान के पास भी बताया गया है।

शामिल ट्रेनें:

  1. यात्री ट्रेन: गेवरा रोड से बिलासपुर आ रही एक MEMU (Mainline Electric Multiple Unit) लोकल ट्रेन
  2. मालगाड़ी: एक खड़ी हुई (या धीमी गति से चल रही) मालगाड़ी।

टक्कर का स्वरूप: MEMU पैसेंजर ट्रेन ने उसी ट्रैक पर आगे चल रही या खड़ी हुई मालगाड़ी को पीछे सेटक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पैसेंजर ट्रेन का इंजन और उसका पहला कोच मालगाड़ी के आखिरी डिब्बे/गार्ड केबिन के ऊपर चढ़ गया , जिससे पैसेंजर कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि पैसेंजर ट्रेन के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए |

02 हताहत और क्षति (Casualties and Damage

यह दुर्घटना अत्यंत घातक थी। विभिन्न आधिकारिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर, हताहतों की संख्या इस प्रकार है:

  • मृत्यु: दुर्घटना में 5 से 8 यात्रियों की दुखद मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में वे लोग शामिल हैं जो टक्कर से सर्वाधिक प्रभावित हुए शुरुआती डिब्बों में यात्रा कर रहे थे।
  • घायल:12 से 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि अन्य को मामूली चोटें आई हैं।
  • क्षतिग्रस्त डिब्बे: पैसेंजर ट्रेन का इंजन और उससे सटा पहला यात्री कोच (महिला बोगी भी प्रभावित हुई) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर के कारण ओवरहेड वायर और सिग्नल सिस्टम को भी भारी नुकसान हुआ है।
  • हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेन के क्षतिग्रस्त डिब्बों से यात्रियों को बाहर निकालने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल करना पड़ा।

03 राहत एवं बचाव अभियान (Relief and Rescue Operations)

दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेलवे, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया।

त्वरित कार्रवाई: रेलवे के बचाव दल (आरपीएफ कर्मियों सहित), स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंचीं। SDRF और NDRF की टीमें भी सहायता के लिए बुलाई गईं।

रेस्क्यू ऑपरेशन: युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया। फंसे हुए यात्रियों को निकालने के लिए कटर मशीन का उपयोग किया गया।

चिकित्सा सहायता: घायल यात्रियों को तत्काल एम्बुलेंस द्वारा बिलासपुर के आस-पास के अस्पतालों, जैसे अपोलो अस्पताल और छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) में पहुँचाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश सहित रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय कलेक्टर संजय अग्रवाल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्यों की निगरानी की।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया और बिलासपुर जिला कलेक्टर को घायलों को हर संभव सहायता और चिकित्सा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

04 रेलवे द्वारा सहायता और मुआवजा (Assistance and Compensation)

रेलवे प्रशासन ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित यात्रियों और उनके परिजनों के लिए अनुग्रह राशि (Ex-gratia) की घोषणा की है:

श्रेणी (Category) / मुआवजा राशि (Compensation Amount)

  • मृतकों के परिजन ₹10 लाख
  • गंभीर रूप से घायल यात्री ₹5 लाख
  • मामूली रूप से घायल यात्री ₹1 लाख

इसके अलावा, रेल प्रशासन घायलों के उपचार और उनके परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।

05 हादसे के संभावित कारण और जांच (Possible Causes and Investigation)

हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए रेल सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Railway Safety – CRS) द्वारा एक विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, प्रारंभिक जांच में कुछ संभावित कारण सामने आए हैं:

  1. सिग्नल ओवरशूट (Signal Overshoot): दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के प्रारंभिक सूत्रों के अनुसार, दुर्घटना का मुख्य कारण MEMU ट्रेन द्वारा निर्धारित सिग्नल को पार कर जाना (रेड सिग्नल को नजरअंदाज करना) माना जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोको पायलट समय पर ट्रेन को रोक नहीं पाया और वह आगे खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई।
  2. मानवीय त्रुटि: यह दुर्घटना लोको पायलट की ओर से हुई मानवीय त्रुटि का परिणाम हो सकती है, जिसमें ब्रेक लगाने में देरी या सिग्नल की अनदेखी शामिल है।
  3. सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी: कुछ अटकलें यह भी हैं कि क्या यह हादसा स्वचालित सिग्नल प्रणाली (Automatic Signal System) में किसी खराबी के कारण हुआ। यह प्रणाली एक ही ट्रैक पर ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  4. ट्रेनों के बीच दूरी: स्वचालित सिग्नलिंग सिस्टम में दो ट्रेनों के बीच लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी बनाए रखना अनिवार्य होता है। जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि क्या इस दुर्घटना में ट्रेनों के बीच की दूरी कम हो गई थी।

जांच टीम सभी पहलुओं, जैसे लोको पायलट को मिले सिग्नल की जानकारी, ट्रेन की गति, और सिग्नलिंग उपकरण की कार्यक्षमता, की बारीकी से जाँच करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा।

06 रेलवे यातायात पर प्रभाव (Impact on Rail Traffic)

इस दुर्घटना के कारण बिलासपुर-कटनी रेलखंड पर रेल यातायात प्रभावित हुआ है।

  • परिचालन ठप: दुर्घटनास्थल पर पटरियों और ओवरहेड वायर को हुए नुकसान के कारण ट्रैक को क्लियर करने तक ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई है।
  • ट्रेनें प्रभावित: कई डाउन-दिशा की ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके मार्गों में परिवर्तन (Diversion) किया गया है, जिससे यात्रियों को असुविधा हो रही है। प्रभावित ट्रेनों में एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस, सीएसएमटी-हावड़ा मेल और गोंदिया-रायगढ़ जन शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं।

07 हेल्पलाइन नंबर (Helpline Numbers)

रेलवे ने यात्रियों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं

ये नंबर यात्रियों के परिजनों को आवश्यक जानकारी और सहायता प्राप्त करने में मदद करेंगे।

08 निष्कर्ष (Conclusion)

बिलासपुर ट्रेन दुर्घटना एक गंभीर त्रासदी है, जिसने रेलवे सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। रेलवे प्रशासन और सरकार युद्धस्तर पर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। सभी की निगाहें अब रेल सुरक्षा आयुक्त की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सके और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। देश इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है।

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