मुंगेली (छत्तीसगढ़) की बेटी Supriya Thakur की प्रेरणादायक कहानी पढ़ें, जिन्होंने छोटे शहर से निकलकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। संघर्ष, सफलता और समाज सेवा की पूरी जानकारी।
छत्तीसगढ़ के छोटे से ज़िले मुंगेली से निकलकर देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बनने वाली एक नाम है — Supriya Thakur।
मुंगेली (छत्तीसगढ़) की बेटी Supriya Thakur
एक साधारण परिवार में जन्म लेकर भी असाधारण सपने देखने वाली सुप्रिया ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी रास्ता नहीं रोक सकती।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
Supriya का जन्म मुंगेली जिले के एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही उनमें कुछ अलग करने की चाह थी।
स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यक्रमों और मंचीय गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं।उनका मानना था कि “सपनों की कोई सीमा नहीं होती, सीमा सिर्फ हमारी सोच होती है।”
आत्मनिर्भर बनने का सफर

जब आसपास के कई युवा सिर्फ नौकरी का इंतजार कर रहे थे, तब Supriya ने खुद के लिए नए रास्ते तलाशे। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और पब्लिक स्पीकिंग के जरिए अपनी पहचान बनाई।आज वे उन लड़कियों के लिए रोल मॉडल हैं जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखती हैं।
समाज के लिए योगदान
Supriya सिर्फ अपनी सफलता तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने:
- लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने
- आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूकता फैलाने
- ग्रामीण युवाओं को डिजिटल स्किल सिखाने जैसे कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया।
- संघर्ष से सफलता तक
उनके जीवन में कई कठिन दौर आए—आर्थिक परेशानियाँ, समाज की रूढ़िवादी सोच और सीमित अवसर। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर असफलता से उन्होंने एक नई सीख ली और आगे बढ़ती रहीं।
आज की पहचान
आज Supriya Thakur सिर्फ मुंगेली की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की पहचान बन रही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ रही है और युवा उनसे जुड़कर प्रेरणा ले रहे हैं।
निष्कर्ष
Supriya Thakur की कहानी यह सिखाती है कि अगर इरादे सच्चे हों, तो छोटे शहर से भी बड़ी उड़ान भरी जा सकती है। वे आने वाली पीढ़ी के लिए एक जीवंत उदाहरण हैं कि आत्मविश्वास, मेहनत और सच्ची लगन से हर मंज़िल हासिल की जा सकती है।




