छत्तीसगढ़: बोर्ड परीक्षा के पहले दिन दिल दहला देने वाली घटना — 12वीं छात्रा ने अपनी जान दे दी

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छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में 18 फरवरी 2026 को एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। जब बोर्ड परीक्षा का पहला दिन था, उसी दिन 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपनी जान दे दी, जिससे परीक्षा और परीक्षा देने वाले छात्रों के परिवारों में गहरा सदमा व्याप्त हो गया है।

📰 दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को मातम में डूबो दिया

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उज्जवल डडसेना नाम की यह छात्रा SECL DAV स्कूल में 12वीं की पढ़ाई कर रही थी और आज उसका फिजिकल एजुकेशन का पेपर था। जब वह परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंची, तो स्कूल के शिक्षक उसके घर गए। घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला और भीतर जाकर देखा गया तो उज्जवल का शव कमरे में पंखे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने लिखा है कि उसकी लाश को मेडिकल कॉलेज को दे दिया जाए। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया।

🧑‍🎓 छात्रा का जीवन और पारिवारिक स्थिति

अखबारों की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जवल के माता-पिता पहले ही दे चुके हैं। वह अपनी दीदी और जीजाजी के साथ रहती थी, और उस दिन घर पर वह अकेली थी, क्योंकि घर के अन्य सदस्य अन्य कार्यों में व्यस्त थे। सुसाइड नोट अंग्रेजी में लिखा हुआ था, जिसमें मेडिकल कॉलेज को देहदान की इच्छा भी व्यक्त की गई है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

यह घटना बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन होने के कारण भी काफी चर्चा में है। तनाव, परीक्षा का प्रेशर और मानसिक स्थिति जैसे पहलू अब चर्चा का विषय बन गए हैं। कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आज के छात्रों पर परीक्षा का दबाव बड़ा भारी पड़ता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

🧠 मानसिक स्वास्थ्य और छात्र जीवन

पिछले कुछ वर्षों में कई बार देखा गया है कि परीक्षा और प्रतिद्वंदिता के बीच युवा मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। तनाव, डिप्रेशन, और अपेक्षाओं के बीच छात्रों पर यह बोझ बेहद भारी हो सकता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी बोर्ड परीक्षा के दौरान तनाव से जुड़ी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का दबाव केवल शैक्षणिक स्तर पर नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। माता-पिता, शिक्षकों और समाज को चाहिए कि वे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें, और तनाव के समय उनके लिए सहारा बनें।

🏫 स्कूल और समुदाय की प्रतिक्रिया

घटना के बाद स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों में रोष है। उज्जवल की मौत से पूरे समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया।

स्कूल के टीचर्स और दोस्तों ने उज्जवल को एक निष्ठावान और मेहनती छात्रा बताया। उधर, स्थानीय लोग भी बस यही चाहते हैं कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए समय पर समाधान किया जाए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए।

📌 निष्कर्ष

यह दर्दनाक घटना यह याद दिलाती है कि बोर्ड परीक्षा केवल एक शैक्षणिक परीक्षा नहीं है — यह युवा मन और भावनाओं पर भी भारी प्रभाव डाल सकती है। हमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए, और उन्हें भावनात्मक समर्थन देना चाहिए।

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